रहे जाते हैं ये अरमान, हाय मेरे सीने मेंन काबे की ज़मीं देखी, न पहुंची मैं मदीने में
तेरे हरम की क्या बात मौला !ता-उम्र कर दे आना मुक़द्दरअल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर
रब्ब-ए-कौनैन ! मेरे दिल की दुआएं सुन लेमें हूँ बेचैन मेरे दिल की सदाएं सुन लेशान आ'ला है तेरी मालिक-ओ-मुख्तार है तू
रोक लेती है आपकी निस्बत, तीर जितने भी हम पे चलते हैंये करम है हुज़ूर का हम पर, आने वाले 'अज़ाब टलते हैं
रोशन सदा रहेगा तेरा नाम या हुसैनक्योंकि किया है आपने वो काम या हुसैनरोशन सदा रहेगा तेरा नाम या हुसैन
रूह-ए-शब्बीर वो मंजर तो बताजब हुई शहर-ए-मदीना से जुदाई होगीये तो ज़ैनब ही बता सकती हैलौट कर कैसे मदीने में वो आई होगी
रब्ब-ए-सल्लिम की सदाएं गुन-गुनाते जाएंगेरब्ब-ए-हब्ली उम्मती की रट लगाते जाएंगेहम गुनाहगारों को रब्ब से बख्शवाते जाएंगे
रुतबा ये विलायत में , क्या गौस ने पाया हैअल्लाह ने वलियों का , सुलतान बनाया हैहै दस्त-ए-'अली सर पर , हसनैन का साया है
















