सहर का वक़्त था मासूम कलियाँ मुस्कुराती थींहवाएं खैर-मकदम के तराने गुनगुनाती थींअभी जिब्रील उतरे भी न थे काबे के मिम्बर से
मरहबा या मुस्तफा मरहबा या मुस्तफामरहबा या मुस्तफा मरहबा या मुस्तफानूर हर सू छा गया है दिन ख़ुशी का आ गयाआये प्यारे मुस्तफा अहलव सहलान मरहबा
नाते मुस्तफा सुन कर रूह जब मचलती हैआशिकों के चेहरे से चाँदनी निकलती हैउनके सदक़े खाते हैं, उनके सदक़े पीते हैंमुस्तफा की चौखट से क़ायनात पलती है
नबी का ज़िक्र ही खुदा का ज़िक्र हैनबी की बात ही खुदा की बात हैयदुल्लाह कह दिया तो साबित हो गयानबी का हाथ ही खुदा का हाथ है
ने'मतें बांटता जिस सिम्त वो ज़ी-शान गयासाथ ही मुंशी-ए-रहमत का क़लम-दान गयाले ख़बर जल्द के गैरों की तरफ ध्यान गयामेरे आक़ा ! मेरे मौला ! तेरे क़ुर्बान गया
नात सरकार की पढ़ता हूँ मैंबस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगीएक तेरा नाम वसीला है मेरारंजो-ग़म में भी इसी नाम से राहत होगी
मदीना छोड़ आए हैंशब-ए-फ़ुरक़त से दिल घबरा रहा हैमदीना आप का याद आ रहा हैमदीना छोड़ आए हैं, मदीना छोड़ आए हैं
मौला सलामत रखे, मेरे हज़ूर ताजुश्शरिया कोमौला सलामत रखे, मेरे हज़ूर ताजुश्शरिया कोमौला सलामत रखे, जा-नशीन-ए-मुफ़्ती-ए-आ'ज़म को
मुज़्दा-बाद, ऐ 'आसियो ! शाफ़े' शह-ए-अबरार हैतहनियत, ऐ मुजरिमो ! ज़ात-ए-ख़ुदा ग़फ़्फ़ार है'अर्श सा फ़र्श-ए-ज़मीं है, फ़र्श-ए-पा 'अर्श-ए-बरींक्या निराली तर्ज़ की नाम-ए-ख़ुदा रफ़्तार है
मिठ्ड़ो मोहम्मद आयो, सल्ले अला सब गयोभली करे आया, भली करे आयाभली करे आया, भली करे आयाबारा रबी-उल-अव्वल! दी ही भलारो आ
मेरे आक़ा की है शान सबसे अलगजैसे रुतबे में क़ुरआन सबसे अलगआक़ा मेरे मदनी आक़ा आक़ा मेरे मदनी आक़ा
















