पैग़ाम सबा लाई है गुलज़ारे नबी सेआया है बुलावा मुझे दरबारे नबी सेहर आह गयी अर्श पे ये आह की क़िस्मत
नबियों में सबसे अफ़ज़ल रुतबा मेरे नबी काक़ुरआन है मुकम्मल चेहरा मेरे नबी काउतरा नहीं ज़मीन पर साया मेरे नबी काअल्लाह का है जलवा, जलवा मेरे नबी का
नामे मुहम्मद कितना मीठा मीठा लगता हैनामे मुहम्मद कितना मीठा मीठा लगता हैसल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम
Aamad hai Aamad hai Aamad haiAamad hai Aamad hai Aamad haiNabi ki Aamad hai Nabi ki Aamad haiHai aaj Jashne Wilaadat Nabi ki Aamad hai
जब गुम्बदे-ख़ज़रा पे वो पहली नज़र गईआँखों के रास्ते मेरे दिल में उतर गईहिज्रे-नबी मे आह, कहाँ बे-असर गईतड़पे जो हम यहाँ तो मदीने ख़बर गई
नूर वाले मुस्तफा आ गए छ गएनूर वाले मुस्तफा आ गए छ गएनूर वाले मुस्तफा शहर आलम में आ गएदेखते ही देखते सारे जहां पे छा गए
जीने की तरफ़ देख न मरने की तरफ़ देखजब चोट लगे दिल को मदीने की तरफ़ देखजो कोई ग़म सताए तो मदीना याद कर लेनान दिल को चैन आए तो मदीना याद कर लेना
सहर का वक़्त था मासूम कलियाँ मुस्कुराती थींहवाएं खैर-मकदम के तराने गुनगुनाती थींअभी जिब्रील उतरे भी न थे काबे के मिम्बर से
मरहबा या मुस्तफा मरहबा या मुस्तफामरहबा या मुस्तफा मरहबा या मुस्तफानूर हर सू छा गया है दिन ख़ुशी का आ गयाआये प्यारे मुस्तफा अहलव सहलान मरहबा
नाते मुस्तफा सुन कर रूह जब मचलती हैआशिकों के चेहरे से चाँदनी निकलती हैउनके सदक़े खाते हैं, उनके सदक़े पीते हैंमुस्तफा की चौखट से क़ायनात पलती है















