• author
    Mohammad Wasim
  • 30/08/2025
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आया नबी का जश्न-ए-विलादत पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत

मेरे सरकार आए ! मेरे दिलदार आए ! नबियों के सरदार आए ! ताजदार-ए-ख़त्म-ए-नबुव्वत आए !

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    Mohammad Wasim
  • 30/08/2025
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मेरे नबी ला-जवाब हैं | मेरा नबी ला-जवाब है

नबियों में गुलाब हैं, रश्क-ए-माहताब हैंरब का इंतिख़ाब हैं, मेरे नबी मेरे नबी मेरे नबी

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    Mohammad Wasim
  • 07/05/2025
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हर दिल में जो रहते हैं वो मेरे मुहम्मद हैं

हर दिल में जो रहते हैं, वो मेरे मुहम्मद हैंजो रब को भी प्यारे हैं, वो मेरे मुहम्मद हैं

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    Mohammad Wasim
  • 07/05/2025
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काश वो चेहरा मेरी आँख ने देखा होता

मुझ को तक़दीर ने उस दौर में लिक्खा होताबातें सुनता मैं कभी, पूछता मा'नी उन के

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    Mohammad Wasim
  • 04/03/2025
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या मुहम्मद मुहम्मद मैं कहता रहा

या मुहम्मद मुहम्मद मैं कहता रहानूर के मोतियों की लड़ी बन गईआयतों से मिलाता रहा आयतेंफिर जो देखा तो ना'त-ए-नबी बन गई

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    Mohammad Wasim
  • 04/03/2025
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ज़िंदगी याद-ए-मदीना में गुज़ारी सारी

ज़िंदगी याद-ए-मदीना में गुज़ारी सारी'उम्र भर की ये कमाई है हमारी सारी

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    Mohammad Wasim
  • 24/02/2025
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ज़माने के हर इक वली ने कहा मुझे तो अली चाहिए

ज़माने के हर इक वली ने कहामुझे तो 'अली चाहिएजो हैं हर ज़माने के मुश्किल-कुशा

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    Mohammad Wasim
  • 22/02/2025
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बेहरे दीदार मुश्ताक़ है हर नज़र, दोनों आलम के सरकार आ जाइये

आक़ा आ जाइये आक़ा आ जाइयेआक़ा आ जाइये आक़ा आ जाइयेबेहरे दीदार मुश्ताक़ है हर नज़रदोनों आलम के सरकार आ जाइये

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    Mohammad Wasim
  • 15/02/2025
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ज़हे-क़िस्मत जो आ जाए क़ज़ा आक़ा की चौखट पर

ज़हे-क़िस्मत जो आ जाए क़ज़ा आक़ा की चौखट परमुकम्मल मौत का आए मज़ा आक़ा की चौखट पर

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    Mohammad Wasim
  • 21/01/2025
  • 1 मिनट का पाठ
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जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है

तू ख़ुशी के फूल लेगा कब तलक तू यहाँ ज़िंदा रहेगा कब तलक

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    Mohammad Wasim
  • 14/01/2025
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लिखा है इक ज़ईफ़ा थी

लिखा है इक ज़ईफ़ा थी जो मक्का में रहती थीवो इन बातों को सुनती थी मगर खामोश रहती थी

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    Mohammad Wasim
  • 09/01/2025
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मेरे दिल में इश्क़-ए-हुज़ूर है | इश्क़-ए-मुहम्मद

मदीने वाले का जो भी ग़ुलाम हो जाएक़सम ख़ुदा की वो 'आली-मक़ाम हो जाए