मेरे सरकार आए ! मेरे दिलदार आए ! नबियों के सरदार आए ! ताजदार-ए-ख़त्म-ए-नबुव्वत आए !
नबियों में गुलाब हैं, रश्क-ए-माहताब हैंरब का इंतिख़ाब हैं, मेरे नबी मेरे नबी मेरे नबी
हर दिल में जो रहते हैं, वो मेरे मुहम्मद हैंजो रब को भी प्यारे हैं, वो मेरे मुहम्मद हैं
मुझ को तक़दीर ने उस दौर में लिक्खा होताबातें सुनता मैं कभी, पूछता मा'नी उन के
या मुहम्मद मुहम्मद मैं कहता रहानूर के मोतियों की लड़ी बन गईआयतों से मिलाता रहा आयतेंफिर जो देखा तो ना'त-ए-नबी बन गई
ज़िंदगी याद-ए-मदीना में गुज़ारी सारी'उम्र भर की ये कमाई है हमारी सारी
ज़माने के हर इक वली ने कहामुझे तो 'अली चाहिएजो हैं हर ज़माने के मुश्किल-कुशा
आक़ा आ जाइये आक़ा आ जाइयेआक़ा आ जाइये आक़ा आ जाइयेबेहरे दीदार मुश्ताक़ है हर नज़रदोनों आलम के सरकार आ जाइये
ज़हे-क़िस्मत जो आ जाए क़ज़ा आक़ा की चौखट परमुकम्मल मौत का आए मज़ा आक़ा की चौखट पर
लिखा है इक ज़ईफ़ा थी जो मक्का में रहती थीवो इन बातों को सुनती थी मगर खामोश रहती थी
मदीने वाले का जो भी ग़ुलाम हो जाएक़सम ख़ुदा की वो 'आली-मक़ाम हो जाए















