बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबानाआ दिल में तुझे रख लूँ, ऐ जल्वा-ए-जानाना
ख़ुदा का नूर तुझ में हू-ब-हू हैख़ुदा पिन्हा मगर तू रू-ब-रू हैतेरी 'अज़मत का अंदाज़ा हो किस कोख़ुदा है और ख़ुदा के बा'द तू है
पैकर-ए-दिल-रुबा बन के आया, रूह-ए-अर्ज़-ओ-समा बन के आयासब रसूल-ए-ख़ुदा बन के आए, वो हबीब-ए-ख़ुदा बन के आया
ज़र्रे झड़ कर तेरी पैज़ारों केताजे सर बनते हैं सय्यारों केहम से चोरों पे जो फ़रमाएं करमख़िल्अ़ते ज़र बनें पुश्तारों के
या रसूलल्लाहि उनज़ुरहा लनाया हबीबल्लाहि इस्मा-कालनाइन्ननी फी बह्रि हम्मिम मुग़रक़न
वक़्त सहरी का हो गया जागोनूर हर सिम्त छा गया जागो उठो सहरी की करलो तैयारीरोज़ा रखना है आज का जागो
वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानीया अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाहया अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह















