तेरी जालियों के निचे, तेरी रहमतों के सायेजिसे देखनी हो जन्नत, वो मदीना देख आये
तारु 'अरब लागे रे खजूर खजूरतारु नाम लागे रे मधुर मधुरमने बोलावी ल्यो, मदीनाहाँ ! मदीना वाड़ा हुज़ूर हुज़ूर
शुक्रिया, अए हाफ़िज़ों ! इस्कार हो करते अदाहिफ़्ज़-ए-क़ुरआन के लिए अल्लाह ने तुमको चुनादस 'अज़ीज़ों की सिफ़ारिश का तुम्हें मुअज़्दा मिलाइस से बढ़कर हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन का भला क्या हो सिला
सर-ए-महफ़िल करम इतना मेरी सरकार हो जाएनिगाहें मुन्तज़िर रह जाएं और दीदार हो जाएतसव्वुर में तेरी हर शय पे यूँ नज़रें जमाता हूँ
सरे शाम ही से फलक के सितारेयही कह रहे हैं चमकते चमकतेदिखाएंगे शाम-ओ-कमर को भी आंखेंमदीने के ज़र्रे दमकते दमकते
सुनते हैं के महशर में सिर्फ उनकी रसाई हैगर उनकी रसाई है लो जब तो बन आई हैमचला है के रहमत ने उम्मीद बंधाई हैक्या बात तेरी मुजरिम क्या बात बनाई है
पाँवे कल कर देते पाँवे आज कर देरब्बा मेरेयां नसीबां विच हज कर दे
रश्के कमर हूँ रंगे रूखे आफताब हूँज़र्रा तेरा जो अये शहे गर्दो जनाब हूँदर्रे नजफ़ हूँ गोहरे पाके खुशाब हूँयानी तुराबे रह-गुज़रे बु-तुराब हूँ
रहे जाते हैं ये अरमान, हाय मेरे सीने मेंन काबे की ज़मीं देखी, न पहुंची मैं मदीने में
तेरे हरम की क्या बात मौला !ता-उम्र कर दे आना मुक़द्दरअल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर















