लोह मदीने की तजल्ली से लगाए हुए हैंदिल को हम मतला-इ-अनवार बनाये हुए हैंएक जलक आज दिखा अये गुम्बदे ख़ज़रा के मकींकुछ भी हैं दूर से दीदार को आये हुए हैं
लब पे सल्ले अला के तरानेअश्क आँखों में आये हुए हैंये हवा ये फ़ज़ा कह रही हैआप तशरीफ़ लाये हुए हैं
लहू का कतरा कतरा बहा देंगे कसम सेनबी पे जान अपनी लुटा देंगे कसम सेमुस्तफा की शान पे न आंच आने देंगे हम
लब्बैक या रसूलल्लाह लब्बैक या रसूलल्लाहलब्बैक लब्बैक लब्बैक या रसूलल्लाहखुद को मिटा देंगे, हम जान लुटा देंगे
क्या शान है तेरी सल्ले अला या अब्दुल क़ादिर जिलानीतू नूरे नबी तू नूरे खुदा या अब्दुल क़ादिर जिलानीहर जा तेरा सिक्का चलता है, कुनैन में सदक़ा बंटता है
क्युं कर न मेरे दिल में हो उल्फत रसूल कीजन्नत में लेके जाएगी चाहत रसूल कीजन्नत में लेके जाएगी चाहत रसूल की
का'बे के बदरुद्दुजा ! तुमपे करोड़ों दुरूदतयबाह के शम्सुद्दोहा ! तुमपे करोड़ों दुरूदशाफ़ा-ए-रोज़-ए-जज़ा ! तुमपे करोड़ों दुरूद
दाग-ए-फुरकत-ए-तैबा , क़ल्ब-ए-मुज़महिल जाताकाश गुम्बद-ए-ख़ज़रा , देखने को मिल जाता
करम मांगता हूँ 'अता मांगता हूँइलाही ! में तुजसे दुआ मांगता हूँ'अता कर तू शाह-ए-करीमी का सदक़ा
का'बे की रौनक का'बे का मंज़र , अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबरदेखूं तो देखे जाऊं बराबर, अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर
जितना दिया सरकार ने मुझको उतनी मेरी औकात नहींये तो करम है उनका वरना मुझमें तो ऐसी बात नहींइश्क़े शहे बत्हा से पहले मुफ़लिसों खस्ता हाल था में जी














